लहुरियादह में स्कूल की जमीन की पैमाइश शुरू, पूर्व IAS दिव्या मित्तल के बयान के बाद फिर चर्चा में आया मामला

मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में उच्च प्राथमिक विद्यालय के लिए जमीन की नाप-जोख और चिन्हांकन का काम शुरू हो गया है। पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक सफर के ऐलान के दौरान गांव के स्कूल का मुद्दा उठाया था। प्रशासन के मुताबिक स्कूल के उच्चीकरण का प्रस्ताव पहले ही स्वीकृत हो चुका था और 25.58 लाख रुपये की राशि भी जारी की जा चुकी है।

लहुरियादह में स्कूल को लेकर फिर शुरू हुई हलचल

मिर्जापुर का लहुरियादह गांव इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। गांव में लंबे समय से उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यालय की जरूरत बताई जाती रही है। अब स्कूल के लिए प्रस्तावित जमीन की पैमाइश और सीमांकन का काम शुरू होने से निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

यह मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया, जब पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने की घोषणा के दौरान अपने पुराने प्रशासनिक कार्यकाल का जिक्र किया और लहुरियादह में स्कूल की जरूरत से जुड़ी बात सामने रखी।

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में स्कूल का मुद्दा उठाया

दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक सफर की घोषणा करते हुए मिर्जापुर के लहुरियादह गांव का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उनके जिलाधिकारी रहते गांव के लोगों ने बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल की मांग रखी थी।

उनके अनुसार, गांव में स्कूल को लेकर पहल की गई थी, लेकिन बाद में विद्यालय भवन का निर्माण आगे नहीं बढ़ सका। इसी मुद्दे को उन्होंने अपने वीडियो में लोगों के सामने रखा।

इसके बाद लहुरियादह में स्कूल के लिए जमीन की नाप-जोख शुरू होने से यह मामला एक बार फिर स्थानीय स्तर पर चर्चा में आ गया।

प्रशासन ने स्कूल को लेकर क्या बताया?

प्रशासन की ओर से बताया गया है कि प्राथमिक विद्यालय लहुरियादह के उच्चीकरण का प्रस्ताव वर्ष 2024-25 में भेजा गया था। इसके बाद वर्ष 2025-26 में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिली।

विद्यालय के लिए कुल 25.58 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रशासन के अनुसार यह राशि 23 अगस्त 2026 को विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में भेजी जा चुकी है।

स्कूल के निर्माण के लिए जमीन भी उपलब्ध कराई गई है। इसी प्रक्रिया के तहत अब जमीन की पैमाइश और सीमांकन का काम आगे बढ़ाया गया है।

स्कूल निर्माण के लिए जमीन की नाप-जोख

लहुरियादह गांव में अधिकारियों की टीम ने विद्यालय के लिए निर्धारित जमीन का निरीक्षण किया। इसके बाद भूमि की नाप-जोख और चिन्हांकन किया गया।

स्कूल निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने से ग्रामीणों को उम्मीद है कि बच्चों को गांव में ही आगे की पढ़ाई की सुविधा मिल सकेगी।

फिलहाल निर्माण कार्य किस गति से आगे बढ़ता है और विद्यालय भवन कब तक तैयार होता है, इस पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।

ग्रामीणों ने दिव्या मित्तल के काम को किया याद

लहुरियादह के कुछ ग्रामीणों ने दिव्या मित्तल के मिर्जापुर कार्यकाल का जिक्र करते हुए उनके द्वारा गांव की समस्याओं पर ध्यान देने की बात कही।

स्थानीय निवासी अनिल कुमार के मुताबिक, ग्रामीणों ने उस समय गांव में कक्षा पांच के बाद की पढ़ाई के लिए स्कूल की मांग रखी थी। उनका कहना है कि स्कूल को लेकर पहल हुई थी, लेकिन बाद में निर्माण नहीं हो पाया।

अनिल कुमार ने दिव्या मित्तल के राजनीति में आने के फैसले पर भी अपनी राय रखी और कहा कि गांव के कई लोग उनके साथ जुड़ाव महसूस करते हैं।

पानी की समस्या का भी किया गया जिक्र

ग्रामीणों ने लहुरियादह में पहले रही पेयजल की समस्या को भी याद किया। उनका कहना है कि गांव में पानी की परेशानी लंबे समय से बनी हुई थी और दिव्या मित्तल के कार्यकाल के दौरान इस समस्या पर काम हुआ।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले ग्रामीणों को पानी के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। पेयजल की व्यवस्था में सुधार के बाद गांव के लोगों को राहत मिली।

हालांकि, ये स्थानीय ग्रामीणों की व्यक्तिगत राय हैं और इन्हें पूरे गांव की सामूहिक राजनीतिक राय नहीं माना जा सकता।

शीला ने भी दिव्या मित्तल को लेकर रखी अपनी बात

लहुरियादह की रहने वाली शीला ने भी दिव्या मित्तल के राजनीति में आने पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दिव्या मित्तल राजनीति में आ रही हैं तो उन्हें आगे आना चाहिए।

शीला के मुताबिक, गांव के लोगों के साथ दिव्या मित्तल का पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने गांव की पानी की समस्या और स्कूल की मांग का भी जिक्र किया।

शीला ने कहा कि ग्रामीण अब चाहते हैं कि दिव्या मित्तल गांव में आएं और लोगों से मुलाकात करें।

स्कूल को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों की नजर आगे के काम पर

लहुरियादह में स्कूल की जमीन की पैमाइश होने के बाद अब मुख्य सवाल निर्माण कार्य को लेकर है। प्रशासन का कहना है कि विद्यालय के उच्चीकरण की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी और इसके लिए धनराशि भी उपलब्ध कराई जा चुकी है।

वहीं ग्रामीणों की इच्छा है कि स्कूल का निर्माण जल्द पूरा हो, ताकि गांव के बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दूर न जाना पड़े।

इस पूरे मामले में दिव्या मित्तल की ओर से उठाया गया मुद्दा और प्रशासन की ओर से बताई गई प्रक्रिया दोनों अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं। प्रशासन के अनुसार परियोजना पहले से स्वीकृत थी, जबकि ग्रामीण अब निर्माण कार्य पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

राजनीति में आने के बाद फिर चर्चा में आया मिर्जापुर कनेक्शन

दिव्या मित्तल ने 29 सितंबर 2026 को राजनीति में आने की घोषणा की थी। इसके बाद मिर्जापुर से उनका पुराना जुड़ाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

लहुरियादह का स्कूल इसी चर्चा का एक अहम हिस्सा बन गया है। गांव में जमीन की पैमाइश शुरू होने के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि विद्यालय का निर्माण कब शुरू होता है और बच्चों को इसका लाभ कब मिलना शुरू होगा।

दिव्या मित्तल ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल से जुड़ने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही है।

FAQ

लहुरियादह में स्कूल की जमीन की पैमाइश क्यों हुई?

लहुरियादह के प्राथमिक विद्यालय के उच्चीकरण के लिए स्कूल भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसी के तहत निर्धारित जमीन की नाप-जोख और सीमांकन किया गया है।

लहुरियादह स्कूल के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है?

प्रशासन के अनुसार विद्यालय के उच्चीकरण के लिए 25.58 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

स्कूल के लिए पैसा कब जारी हुआ?

प्रशासन के अनुसार 25.58 लाख रुपये की राशि 23 अगस्त 2026 को विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में भेजी गई थी।

दिव्या मित्तल ने लहुरियादह स्कूल के बारे में क्या कहा?

दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक ऐलान के दौरान बताया कि उनके जिलाधिकारी कार्यकाल में गांव के लोगों ने बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल की मांग रखी थी और इस दिशा में पहल की गई थी।

क्या लहुरियादह में स्कूल का निर्माण शुरू हो गया है?

स्कूल के लिए जमीन की पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आगे निर्माण कार्य किस गति से पूरा होता है, यह संबंधित विभाग की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

लहुरियादह के ग्रामीण दिव्या मित्तल के बारे में क्या कहते हैं?

कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने उनके प्रशासनिक कार्यकाल और गांव में पानी की समस्या से जुड़े कामों का उल्लेख किया है। कुछ ग्रामीणों ने उनके राजनीति में आने के फैसले पर भी अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त की है।

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