पूर्वांचल में पर्यटन का बड़ा उछाल: 2025 में 17.31 करोड़ पर्यटक यात्राएं दर्ज, काशी और विंध्याचल बने प्रमुख केंद्र

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ा है। वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ मंडल में दर्ज पर्यटक यात्राओं की संख्या 2013 के 52.51 लाख से बढ़कर 2025 में 17.31 करोड़ पहुंच गई। काशी विश्वनाथ मंदिर, सारनाथ और मां विंध्यवासिनी धाम इस क्षेत्र के प्रमुख आकर्षण हैं।

पूर्वांचल में धार्मिक पर्यटन ने बनाया नया रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का विस्तार देखने को मिल रहा है। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, सारनाथ और मिर्जापुर के मां विंध्यवासिनी धाम जैसे प्रमुख स्थलों पर देशभर से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। पर्यटन विभाग से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ मंडल में दर्ज पर्यटक यात्राओं की संख्या वर्ष 2013 में 52.51 लाख थी, जो 2025 में बढ़कर 17.31 करोड़ हो गई।

इन आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में दर्ज पर्यटक यात्राओं में लगभग 3,197 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इससे पूर्वांचल में धार्मिक पर्यटन के बढ़ते महत्व का पता चलता है। हालांकि, इन आंकड़ों को पर्यटक यात्राओं के रूप में समझना चाहिए, क्योंकि एक ही व्यक्ति अलग-अलग अवसरों पर यात्रा कर सकता है।

2013 से 2025 तक कैसे बदली पर्यटन की तस्वीर?

पूर्वांचल में पर्यटन की वृद्धि एक ही साल में नहीं हुई। शुरुआती वर्षों में पर्यटकों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ी, लेकिन कोविड महामारी के दौरान धार्मिक स्थलों और यात्रा गतिविधियों पर पड़े असर से इसमें भारी गिरावट आई। इसके बाद हालात सुधरे और पर्यटन गतिविधियों में तेजी आई।

वर्ष 2025 तक दर्ज पर्यटक यात्राओं की संख्या 17.31 करोड़ पहुंच गई। यह आंकड़ा 2013 के मुकाबले कई गुना अधिक है। वर्ष 2026 में भी पर्यटकों का आना जारी रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ मंडल में कुल 98.03 लाख पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं।

काशी विश्वनाथ मंदिर बना धार्मिक पर्यटन का प्रमुख आकर्षण

वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। गंगा घाटों, प्राचीन मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के कारण भी वाराणसी की अलग पहचान है।

दिसंबर 2021 में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ था। इसके बाद मंदिर परिसर और गंगा घाटों के बीच आवागमन की सुविधाओं में बदलाव आया। श्रद्धालुओं को बेहतर तरीके से मंदिर तक पहुंचने का रास्ता मिला और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला।

काशी आने वाले पर्यटक मंदिर दर्शन के साथ गंगा आरती, घाटों और शहर की ऐतिहासिक गलियों को भी देखने पहुंचते हैं। धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय होटल, परिवहन, भोजन और अन्य व्यवसायों को भी इससे काम मिलता है।

सारनाथ में बौद्ध विरासत देखने आते हैं देश-विदेश के पर्यटक

वाराणसी के पास स्थित सारनाथ बौद्ध धर्म के प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। मान्यता है कि ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान गौतम बुद्ध ने यहीं अपना पहला उपदेश दिया था। इस घटना को बौद्ध परंपरा में धर्मचक्र प्रवर्तन के नाम से जाना जाता है।

सारनाथ का धमेख स्तूप, पुरातात्विक अवशेष और संग्रहालय इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों को आकर्षित करते हैं। यहां श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार और अन्य देशों से बौद्ध श्रद्धालु भी पहुंचते हैं।

सारनाथ का महत्व केवल धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं है। यहां की ऐतिहासिक धरोहर भारतीय इतिहास, बौद्ध दर्शन और प्राचीन कला को समझने का अवसर देती है।

मिर्जापुर के मां विंध्यवासिनी धाम में बढ़ रही श्रद्धालुओं की आवाजाही

मिर्जापुर जिले का मां विंध्यवासिनी मंदिर पूर्वांचल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सामान्य दिनों में भी मंदिर में दर्शन करने आने वाले भक्तों की आवाजाही बनी रहती है।

विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी मंदिर के अलावा मां काली खोह और मां अष्टभुजा मंदिर भी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। इन तीनों मंदिरों के दर्शन को विंध्य त्रिकोण परिक्रमा के रूप में जाना जाता है।

विंध्य त्रिकोण की धार्मिक परंपरा के कारण श्रद्धालु एक ही यात्रा में तीनों मंदिरों के दर्शन करने की योजना बनाते हैं। इससे विंध्याचल और आसपास के क्षेत्रों में परिवहन, होटल, भोजन, प्रसाद और स्थानीय दुकानों से जुड़े कारोबार को भी अवसर मिलता है।

2026 में भी जारी है पर्यटकों का आना

पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक कार्यालय की ओर से 22 अक्टूबर 2026 को RTI के तहत दिए गए जवाब में सितंबर 2026 के आंकड़े भी सामने आए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उस महीने वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ मंडल में 98.03 लाख पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं।

इनमें लगभग 97.80 लाख यात्राएं घरेलू पर्यटकों की थीं, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब 19 हजार दर्ज की गई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों का बड़ा हिस्सा भारतीय पर्यटकों और श्रद्धालुओं से जुड़ा हुआ है।

हालांकि, एक महीने के आंकड़े के आधार पर पूरे वर्ष की कुल संख्या का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। साल के बाकी महीनों के आंकड़े सामने आने के बाद ही 2026 की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़ी, विदेशी पर्यटन अब भी चुनौती

पूर्वांचल में दर्ज पर्यटक यात्राओं की वृद्धि में घरेलू पर्यटकों की बड़ी भूमिका दिखाई देती है। वर्ष 2025 के आंकड़ों में घरेलू पर्यटकों की संख्या 17 करोड़ 27 लाख से अधिक दर्ज की गई, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब 3.21 लाख थी।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2019 में इस क्षेत्र में लगभग 3.50 लाख विदेशी पर्यटक आए थे। वर्ष 2025 में विदेशी पर्यटकों की संख्या इससे कम रही। इसका मतलब है कि घरेलू धार्मिक पर्यटन में तेज बढ़ोतरी के बावजूद विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की दिशा में अभी और काम करने की गुंजाइश है।

बेहतर पर्यटन जानकारी, बहुभाषी संकेतक, सुविधाजनक परिवहन, स्वच्छता, पर्यटक सहायता और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण से विदेशी यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाया जा सकता है।

पर्यटन बढ़ने से स्थानीय कारोबार को मिल सकते हैं नए अवसर

जब किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, तो इसका असर केवल मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं रहता। होटल, धर्मशाला, टैक्सी, ऑटो, स्थानीय भोजनालय, प्रसाद की दुकानें, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार भी पर्यटकों की आवाजाही से जुड़े होते हैं।

वाराणसी, सारनाथ और विंध्याचल जैसे स्थानों पर पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बन सकते हैं। लेकिन इसका लाभ लंबे समय तक बनाए रखने के लिए साफ-सफाई, यातायात प्रबंधन, पर्यटकों की सुरक्षा और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण पर ध्यान देना जरूरी है।

पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ भीड़ प्रबंधन और पर्यावरण की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है। धार्मिक स्थलों के आसपास व्यवस्थित सुविधाएं विकसित करने से श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों, दोनों को लाभ मिल सकता है।

पूर्वांचल के पर्यटन का भविष्य क्या हो सकता है?

पूर्वांचल में धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन को एक साथ विकसित करने की काफी संभावनाएं हैं। वाराणसी के घाट और मंदिर, सारनाथ की बौद्ध विरासत तथा विंध्याचल के धार्मिक स्थल अलग-अलग तरह के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

इन स्थानों को जोड़कर यात्रा संबंधी जानकारी, बेहतर परिवहन और सुविधाजनक पर्यटन योजनाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो पर्यटक एक ही यात्रा में कई प्रमुख स्थलों को देख सकते हैं। साथ ही, स्थानीय संस्कृति, खानपान और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देने से क्षेत्र की पहचान और मजबूत हो सकती है।

आने वाले समय में पर्यटन की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से नहीं, बल्कि सुविधाओं की गुणवत्ता, स्थानीय लोगों को मिलने वाले लाभ और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से भी आंकी जाएगी।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पूर्वांचल में 2025 में कितनी पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं?

उपलब्ध RTI आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ मंडल में 2025 के दौरान कुल 17.31 करोड़ पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं।

वर्ष 2013 में पूर्वांचल में कितनी पर्यटक यात्राएं दर्ज हुई थीं?

वर्ष 2013 में इन मंडलों में दर्ज पर्यटक यात्राओं की संख्या 52.51 लाख थी।

पूर्वांचल में पर्यटन बढ़ने के प्रमुख कारण क्या हैं?

काशी विश्वनाथ मंदिर, सारनाथ और मां विंध्यवासिनी धाम जैसे धार्मिक व ऐतिहासिक स्थलों की लोकप्रियता इस क्षेत्र के पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। बेहतर सुविधाएं और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मिर्जापुर में कौन-कौन से प्रमुख धार्मिक स्थल हैं?

मिर्जापुर जिले के विंध्याचल क्षेत्र में मां विंध्यवासिनी मंदिर, मां काली खोह मंदिर और मां अष्टभुजा मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। इन तीनों मंदिरों की यात्रा को विंध्य त्रिकोण परिक्रमा कहा जाता है।

क्या 2026 में भी पूर्वांचल में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में वाराणसी, विंध्याचल और आजमगढ़ मंडल में 98.03 लाख पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं। पूरे वर्ष की तुलना के लिए 2026 के सभी महीनों के आंकड़े आवश्यक होंगे।

क्या इन आंकड़ों का मतलब 17.31 करोड़ अलग-अलग पर्यटक हैं?

नहीं, इन आंकड़ों को दर्ज पर्यटक यात्राओं के रूप में समझना अधिक सटीक है। एक ही व्यक्ति अलग-अलग अवसरों पर यात्रा कर सकता है, इसलिए यात्राओं की संख्या और अलग-अलग व्यक्तियों की संख्या समान होना जरूरी नहीं है।

निष्कर्ष: पूर्वांचल में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का विस्तार वाराणसी, सारनाथ और विंध्याचल जैसे स्थलों को नई पहचान दे रहा है। 2025 में दर्ज 17.31 करोड़ पर्यटक यात्राएं इस क्षेत्र में बढ़ती आवाजाही को दर्शाती हैं। आने वाले समय में बेहतर सुविधाओं, स्थानीय रोजगार और विरासत संरक्षण पर ध्यान देना इस विकास को टिकाऊ बनाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

Leave a Comment